Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पोऽस्मि चिद्दीपो निरहंकारवासनः ।
त्वयाहंकारबीजेन न संबद्धोऽस्म्यसन्मय ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
अपना उससे असम्बन्ध देखना ही उसका त्याग है, इस आशय से कहते हैं।
हे असन्मयचित्त, मैं अहंकारवासना से रहित निर्विकल्प स्वयं ज्योति चैतन्य हूँ। अहंकार के बीजभूत
तुमसे मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है