Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
भूत्वा त्वहमिदं वच्मि वेद्मि तिष्ठामि यामि च ।
आत्मावलोकनेनाहमनहंकारतां गतः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि तुममे अहंकार आदि सर्वथा नहीं है, तो तुम वचन आदि से कैसे व्यवहार करते हो ? ऐसी
शंका होने पर कहते हैं।
नट के समान तात्कालिक तद्भाव की कल्पना द्वारा अहंकार बनकर यह (तुम्हें उपदेश आदि)
कहता हूँ, नेत्र आदि से जानता हूँ, बैठता हूँ तथा चलता हूँ। वास्तव में आत्मदर्शन से मैं अहंकारशून्यता
को प्राप्त हो गया हूँ