Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
नूनमेवाहमेवैते मन्ये ज्ञाश्चक्षुरादयः ।
यान्तु तिष्ठन्तु वा देहे ममैते तु न किंचन ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
मुझे इसका पूरा निश्चय है कि वास्तव में ये चक्षु आदि मैं ही हूँ। यदि ये मुझसे
भिन्न हैं, तो जड़ हैं चाहे मेरे शरीर में रहें अथवा जायें । ये मेरे कोई नहीं हे