Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
स्पर्शनाय निजे तत्त्वे यदि जाता त्वगुन्मुखी ।
तत्कोयं स्यादहं नाम कुपिशाच इवोदितः ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि त्वचा अपने विषय में स्पर्श के लिए तत्पर हुई, तो यह “अहम्” नामक दुष्ट
पिशाच के तुल्य कौन उदित हुआ ?