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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 55

संस्कृत श्लोक

रसेष्वभिनिषण्णेऽस्मिन्स्वक्रमे रसनेन्द्रिये । अहं मृष्टभुगित्येष कुतस्त्यः कुत्सितो भ्रमः ॥ ५५ ॥

हिन्दी अर्थ

रसनेन्द्रिय के अपने विषय रसो में प्रवृत्त होने पर मैं मीठा भोजन करनेवाला हूँ, इस प्रकार का गर्हित भ्रम कहाँ से आता है ?