Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
प्राक्पुरस्ताच्च सर्वाणि सन्ति वस्तूनि नाभितः ।
मध्ये स्फुटत्वमेतेषां कैवास्था हतरूपिणी ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
देश से परिच्छिन्न होने के कारण भी देह आदि वस्तुओ में आस्था उचित नहीं है, ऐसा कहते है ।
उत्पत्ति के पूर्वं और नाश के पश्चात् सर्वत्र देह आदि सब वस्तुएँ नहीं हँ । अपने आधार वित्तेभरया
हाथ भर प्रदेश में उनकी विद्यमानरूप से प्रतीति होती है यदि विकल्पपूर्वक यह विचार किया जाय
कि उनकी उक्त सकल प्रदेश में प्रतीति होती है या उस एक देश में, तो यह निर्वचन करना कठिन हो
जायेगा । उनमें भी हतरूपिणी यह आस्था कौन है ? यानी अनुचित हे