Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 65

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 65

संस्कृत श्लोक

चित्ते क्षयिणि संक्षीणे देहो ह्यामूलितो भवेत् । वर्धमाने तरुरिव शतशाखः प्रवर्तते ॥ ६५ ॥

हिन्दी अर्थ

देह को जो चित्त के अधीन कहा, उसका फल कहते हैं। विनाशी चित्त के क्षीण होने पर देह उन्मूलित हो जाता है और चित्त के बढ़ने पर वृक्ष के समान सैकड़ों शाखाप्रशाखावाला होता है