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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

क्षीयते मनसि क्षीणे देहः प्रक्षीणवासनः । मनो न क्षीयते क्षीणे देहे तत्क्षपयेन्मनः ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

मन के क्षीण होने पर शरीर क्षीण वासनावाला होकर क्षीण हो जाता हे । देह के क्षीण होने पर मन क्षीण नहीं होता, इसलिए मन को ही क्षीण करना चाहिए