Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
संकल्पपादपं तृष्णालतं छित्त्वा मनोवनम् ।
विततां भुवमासाद्य विहरामि यथासुखम् ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्परूपी वृक्षों से भरे तृष्णारूपी लतावाले मनरूपी वन को छिन्न-भिन्न कर
विस्तृत मुक्तिरूपी भूमि को प्राप्तकर मैं सुखपूर्वक विहार करता हूँ