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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 68

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 68

संस्कृत श्लोक

प्रक्षीयमाणमेवेदं न मनो मनसि स्थितम् । प्रशाम्यद्वासनाजालं प्रावृडन्त इवाम्बुदः ॥ ६८ ॥

हिन्दी अर्थ

संकल्प का नाश होने पर क्षीण हो रहा अतएव मन में (मनःस्वभाव मेँ) स्थित न हुआ यह मन वासनाजाल से रहित होकर वर्षा ऋतु के अन्त में मेघ के समान नष्ट हो जायेगा