Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
जीव्यते म्रियते चेति कुविकल्पकमालिनी ।
कलना मनसामेव नात्मनो विमलात्मनः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
मरण और जीवन केवलमात्र मन की कल्पनाएँ हैं, इस कारण भी मरण और जीवन में द्वेष ओर
वांछा की प्राप्ति नहीं होती, ऐसा कहते हैं।
जीता है ओर मरता है, इस प्रकार की कल्पना, जो कुविकल्पों की मालाओं से भरी हुई है, मनों की
ही है, निर्मल स्वरूप आत्मा की नहीं हैं