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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

चितो न जीवितेनार्थः सर्वात्मा सर्वजीवितम् । किं प्राप्स्यति कदात्मैषा प्रायता यदि जीवितम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

अविनाशी अद्वितीयात्मा का दर्शन होने पर वध्य-घातक बुद्धि ही नहीं रह जाती है, अतएव अत्यन्तिक अभय सिद्धि हो जाती है, यह आशय है । जिसको जीवन से प्रयोजन है, उसे मरने से भय होता है, किन्तु चित्‌ का जीवन से कोई प्रयोजन नहीं है, ऐसा कहते हैं। चित्‌ का जीवन से कोई प्रयोजन नहीं है क्योंकि सर्वात्मा चित्‌ ही सब वस्तुओं का जीवन है। यदि सब देश, काल और वस्तुओं में फैली हुई स्वरूपभूत चिति ही इसका जीवन है, तो उस जीवन से कब क्या दूसरी अप्राप्त वस्तु प्राप्य होगी, जिसके लिए उसकी इच्छा होगी ?