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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

चितो न जन्ममरणे सर्वगायाश्चितः किल । किं नाम म्रियते जन्तुर्मार्यते केन वापि किम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव जन्म-मरण भी मेरे नहीं हैं, ऐसा कहते हैं। चित्‌ के जन्म-मरण नहीं हैं, क्योंकि वह सर्वव्यापक और चित्रूप है। अतएव क्या जीव मरता है और क्या किसी के द्वारा मारा जाता है यानी जीव का मरना और मारना दोनों असंगत हैं