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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

तद्भस्म पवनानीतं सास्थि वायुरयोजयत् । स्वदेहे भृशमुत्सन्ने त्रिनेत्रव्रतवानिव ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

आँधी से उड़ाई हुई हड्डियों से युक्त वह भस्म श्री महादेवजी के भस्मधारणरूपी व्रतवाले की नाई प्रचण्ड वायु ने तपस्या से कृश शरीर की तरह अभक्ष्य अपने शरीर मेँ लगाई अर्थात्‌ उड़ाई