Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तच्चण्डपवनोद्धूतमावृत्त्य गगनं क्षणात् ।
शरदीवाभ्रमिहिका क्वापि भस्मास्थिमद्ययौ ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रचण्ड वायु से उड़ाई हुई वह हड्डियों से मिली हुई भस्म क्षण भर आकाश को ढक, कर शरद् ऋतु
की बदली की तरह कहीं चली गई