Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
क्रमाद्गगनमध्यस्थाश्चन्द्रमण्डलतां ययुः ।
धूमा गगनकोशस्थाः शीतलाम्बुदतामिव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार
गगन कोष में स्थित कुहरा शीतल मेघ भाव को प्राप्त कर लेता है उसी प्रकार आकाश के मध्य में स्थित
प्राण क्रम से चन्द्रमण्डलता को प्राप्त हुए