Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verses 20–21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verses 20–21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 20,21
संस्कृत श्लोक
कलाकलापसंपूर्णे ते तस्मिंश्चन्द्रमण्डले ।
पुण्यराशाविवापूर्णे रसायनमहार्णवे ॥ २० ॥
रसायनमया धाराः संपन्नाः प्राणवायवः ।
मणियष्टिसमाकारा जालेष्विन्दोरिवांशवः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
अमृतमय कलाओं के समूह से भली भाँति पूर्ण एवं
धर्ममेघाख्यसमाधि की तरह प्रह्लाद से भरे हुए, रसायन महासागररूपी उस चन्द्रमण्डल में प्राणवायु
जिस प्रकार गवाक्ष में झरोखे में गई हुई चन्द्र किरणें स्फटिक दण्डाकार हो जाती है उसी तरह अमृतमय
किरणों की धारा बन गये