Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सा पपाताम्बराद्धारा शेषे शारीरभस्मनि ।
रसायनी हरशिरःपतितेव सुरापगा ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार महादेवजी के सिर पर अमृतमय गंगा की धारा गिरती
है उसी प्रकार प्राणों की वह अमुतमय धारा शेष बचे हुए शरीर की भस्म पर आकाश से गिरी