Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
उदभूदिन्दुबिम्बाभं चतुर्बाहुवपुस्तया ।
प्रस्फुरन्मन्दरादब्धेः पारिजात इव द्रुमः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार मंथन करने से चंचल मन्दराचलवाले समुद्र से पारिजात वृक्ष उत्पन्न हुआ था उसी प्रकार
उक्त अमृतमय धारा से चन्द्रबिम्ब की तरह कान्तिवाला चार भुजाओं से युक्त शरीर उत्पन्न हुआ