Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
उद्दालकशरीरं तन्नारायणतयोदितम् ।
प्रफुल्लनेत्रवक्त्राब्जमाबभौ दीप्तिसुन्दरम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
नारायणरूप से प्रादुर्भूत एवं कमल की तरह खिले हुए नेत्र एवं प्रसन्न मुखवाला अतएव कान्ति से
मनोहर उद्दालक का शरीर अत्यन्त सुशोभित हुआ