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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

रसायनमयाः प्राणास्तच्छरीरमपूरयन् । सलिलौघा इव सरो वृक्षं मधुरसा इव ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार जल का समुदाय सरोवर को एवं वसन्त ऋतु मे कोमल पत्तो को पैदा करनेवाले पार्थिव रस वृक्ष को सवांगपूर्ण बना देते हैं उसी प्रकार अमृतमय प्राणों ने उनके शरीर को सवांगपूर्ण बना दिया