Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अन्तःकुण्डलिनीं प्राणाः पूरयामासुरादृताः ।
चक्रानुवर्तप्रसृतां पयांसीव सरिद्वराम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार चक्राकार भँवरों से बह रही
श्री गंगाजी को जल पूर्ण करते हैं उसी प्रकार प्राणों ने अन्दर कुण्डलिनी को पूर्णं किया