Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
बभार हृदयाकाशे मनः संयममागतम् ।
विन्ध्यखात इवोन्मत्तं गजं युक्तिवशीकृतम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे हाथी पकडनेवाले लोग विन्ध्याचल के गड में युक्तियों से वश में किये हुए उन्मत्त हाथी को पकड़
लेते हैं, उसी प्रकार उन्होने एक विषय में धारणा-ध्यान-समाधिरूप संयम के प्रति उन्मुख (आकृष्ट)
एवं प्रत्याहाररूप उपायों से वश में किये हुए मन को हृदयाकाश में धारण किया