Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
दुधावातिविकल्पौघान्प्रतिभासमुपेयुषः ।
पुरः परिस्फुरद्रूपान्मशकानिव मारुतः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार सामने उडते हुए मच्छरों को वायु दूर उड़ा ले
जाता है उसी प्रकार ब्रह्माकार चित्तवृत्ति में विक्षेप करने के लिए विपरीत भावना से उठे हुए विकल्पों को
उन्होने दूर भगा दिया अर्थात् नष्ट कर दिया