Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
विकल्पौघे परालूने सोऽपश्यद्धदयाम्बरे ।
तमच्छन्नविवेकार्कं लोलकज्जलमेचकम् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
विकल्पों के समूह का उच्छेद हो जाने पर उन्होंने अपने हृदयाकाश में चंचल, काजल की
तरह काले तमोगुण की अधिकता से उत्पन्न अन्धकार को देखा, जिसने विवेकरूपी सूर्य को आच्छन्न
कर दिया था