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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

मोहमप्येष मनसस्तं ममार्ज महाशयः । यामिनीजनितं जाड्यं भुवनादिव भास्करः ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार सूर्य संसार से रात्रि द्वारा उत्पन्न अन्धकार को हटा देता है उसी प्रकार इस विवेकी ने उस मोह को मन से हटा दिया