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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

ततस्तेजस्तमोनिद्रामोहादिपरिवर्जितम् । कामप्यवस्थामासाद्य विशश्राम मनः क्षणम् ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके अनन्तर तेज अन्धकार, निद्रा, मोह आदि से रहित मन किसी अनिर्वचनीय अवस्था को प्राप्त करके क्षण भर के लिए शान्त हो गया