Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
द्विजचेतनहंसोऽसावानन्दसरसि स्थितः ।
अतिष्ठच्छरदच्छे खे कलापूर्ण इवोडुपः ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे शरद् ऋतु के स्वच्छ आकाश में समस्त कलाओं से परिपूर्ण चन्द्रमा स्थित होता हे । वैसे ही
द्विजचेतनात्मा उद्दालक आनन्दरूपी सरोवर में हंस की तरह स्थित हो गये