Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
बभूवावातदीपाभो लिपिकर्मार्पितोपमः ।
वीतवीच्यम्बुधिप्रख्यो वृष्टमूकाम्बुदस्थितिः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह उद्दालक ऋषि
निर्वात दीपक के सदुश कान्तिवाले, चित्रलिखित के सदृश अनन्यमनस्क, निस्तरंग समुद्र के गम्भीर,
एवं पूर्व मे जो वृष्टि कर चुका हो बाद में निर्जल और मूक (गर्जन शून्य) हो गया हो ऐसे मेघ की स्थिति
के समान स्थितिवाले हो गये