Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
अथैतस्मिन्महालोके तिष्ठन्नुद्दालकश्चिरम् ।
अपश्यद्व्योमगान्सिद्धानमरानपि भूरिशः ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर इस महालोक में (परम पद में) चिरकाल तक
स्थित हुए अथवा इस महाप्रकाश में चिरकाल तक स्थित हुए उद्दालक ऋषि ने आकाश मेँ चलनेवाले
बहुत से सिद्ध ओर देवताओं को देखा