Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
आगतानि विचित्राणि सिद्धिजालानि चाभितः ।
शक्रार्कपददातॄणि नीरन्ध्राण्यप्सरोगणैः ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ उनके चारों ओर इन्द्रपद और सूर्य पद देनेवाले ओर
अप्सराओं से निबिड सिद्धियों के बहुत से विचित्रगण भी आ गये