Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 69
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
क्षणं वर्षसहस्रं वा तत्र लब्ध्वा स्थितिं मनः ।
रतिमेति न भोगौघे दृष्टस्वर्ग इवावनौ ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष ने स्वर्ग देख लिया उसका प्रेम
पृथिवी पर किसी भोगसमाग्री मे नहीं होता उसी प्रकार मन क्षणभर अथवा हजार वर्ष तक उक्त स्थिति
को प्राप्त कर भोगसामग्री में प्रेम नहीं करता