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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अतिष्ठत्प्राणपवनश्चिद्रसापूरिताम्बरे । त्यक्तदेहः परित्यक्तनीडः खग इवाम्बरे ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

मुनि का रेचित प्राण वायु कहाँ ठहरा, इस पर कहते है। जिस प्रकार पक्षी घोंसले को छोडकर आकाश में घूमता है उसी प्रकार उनका रेचित प्राणवायु शरीर का त्यागकर ब्रह्म की भावना से अभिव्यक्त हार्दरस से भरे हुए बाह्याकाश मेँ स्थित हुआ