Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
हृदयाग्निर्ज्वलज्ज्वालो ददाह निखिलं वपुः ।
उत्पातपवनोद्भूतो दावः शुष्कमिव द्रुमम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
निरन्तर ब्रह्मभावना से क्या हुआ यह कहते है ।
प्राणों के निष्क्रमण और संघर्षं से हृदय में भावना द्वारा उत्पन्न हुई जलती ज्वाला ओंवाली अग्नि
ने, जिस प्रकार उत्पात पवन से पैदा हुई दावाग्नि शुष्क वृक्षों को जला देती है उसी प्रकार उनके
सारे शरीर को जला दिया