Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यावदित्थमवस्थैषा प्रणवप्रथमक्रमे ।
बभूव न हठादेव हठयोगो हि दुःखदः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार प्रणव के प्रथम अंश में जितनी यह पूर्वोक्त अवस्था हुई,
सब भावना से ही हुई, हठ से नहीं हुई, क्योकि हठयोग से अर्थात् बलात्कार से प्राणों को बाहर
निकालने में मूर्छा, मरण आदि का भय रहता है