Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
तत्पदं साधवः प्राप्य दृश्यदृष्टिमिमां पुनः ।
नायान्ति खदिरोद्यानं लब्धचैत्ररथा इव ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जो पुरुष चैत्ररथ (कुबेर का उद्यान) प्राप्त कर चुके हो वे खदिर के (खैर के)
उद्यान में नहीं जाते हैं वैसे ही सन्तपुरुष ब्रह्मसाक्षात्कार करके इस बाह्य प्रपंचात्मक दृष्टि को फिर
प्राप्त नहीं करते हैं