Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 80
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 80
संस्कृत श्लोक
आकल्पमुचितान्भुङ्क्ष्व भोगानभिमतान्विभो ।
स्वर्गादिफलभोगार्थमेवाशेषतपःक्रियाः ॥ ८० ॥
हिन्दी अर्थ
हे विभो, प्रलयपर्यन्त
अपने वांछित और उचित भोग्य पदार्थो का उपभोग कीजिये क्योकि समस्त तपस्याएँ स्वर्गादिरूप फल
के भोगने के लिए होती है