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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 55, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

तस्थौ समसमाभोगः परां विश्रान्तिमागतः । अनानन्दसमानन्दमुग्धमुग्धमुखद्युतिः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

विक्षेप-वैषम्य से सर्वथा रहित स्वभाववाले एवं अनुपम आनन्द से अत्यन्त मनोहर मुखकान्तिवाले वे उद्दालक ऋषि सर्वोत्कृष्ट आनन्दपदवी को प्राप्त हो वैठ गये