Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 55, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यदा सर्वाणि दृश्यानि सत्तासामान्यवेदनम् ।
स्वरूपेण स्वरूपाभं सत्तासामान्यता तदा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जब चित्त की
वृत्तियो मेँ अभिव्यक्त हुआ अखण्ड चैतन्य समस्त भूतप्रपंच का अपलाप कर के अपने पारमार्थिक
स्वरूप से स्वप्रकाशात्मक सत्ता सामान्यात्मक, केवल चित्स्वरूप होता है तब सत्तासामान्यता समञ्जनी
चाहिये