Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 55, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
दृष्टिरेषा हि परमा सदेहादेहयोः सदा ।
मुक्तयोः संभवत्येव तुर्यातीतपदोपमा ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, चूँकि यह उक्त सप्तम भूमिका
रूढ़दृष्टि तुर्यातीत पद के समान है, इसीलिए सदेहमुक्त ओर विदेहमुक्त दोनों को सदा होती ही है
यानी सदेहमुक्त ओर विदेहमुक्त दोनों की समानस्वरूपस्थिति में भेद नहीं है