Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अवासनं स्थिरं प्रोक्तं मनोध्यानं तदेव तु ।
स एव केवलीभावः शान्ततैव च सा सदा ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनारहित मन स्थिर कहा गया है, वही ध्यान है, वही केवलीभाव है और वही सदा शान्तता है