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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

चेतश्चलाचलत्वेन परम कारणं स्मृतम् । ध्यानाध्यानदृशोस्तेन तदेवानङ्कुरं कुरु ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त चंचलता और अचंचलता से समाधि में और असमाधि में परम कारण कहा गया है, इसलिए उसी को आप अंकुररहित यानी वासनारहित कीजिये