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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

चेतसो यदकर्तृत्वं तत्समाधानमुत्तमम् । तं विद्धि केवलीभावं सा शुभा निर्वृतिः परा ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त का जो अकर्तृत्व है वह उत्तम समाधि है, उसी को आप केवलीभाव जानिये और वही श्रेष्ठ परम सुख विश्रान्ति है