Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
घनवासनमेतत्तु चेतः कर्तृत्वभाजनम् ।
सर्वदुःखप्रदं तस्माद्वासनां तनुतां नयेत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रचुर वासनावाला यह मन कर्तृत्व-भाजन (कर्ता) है।
कर्ता होने के कारण ही सब दुःख देता है, इसलिए वासना को क्षीण बनाना चाहिये