Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
प्रशान्तजगदास्थोऽन्तर्वीतशोकभयैषणः ।
स्वस्थो भवति येनात्मा स समाधिरिति स्मृतः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जिससे
आत्मा देह दृश्य में अहंताममताअभिनिवेश से रहित होता है, शोक, भय और एषणाओं से शून्य होता
है ओर स्वस्थ (स्वरूपस्थित) होता है, वह “समाधि” कही जाती है