Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अरण्यसदने तुल्ये समाहितमनोदृशाम् ।
भवतामिह भूतानां भूतानां महतामिव ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
भलीभाँति समाहित चित्तवाले अहंकार
आदि दोषों से रहित गृहस्थं के लिए घर ही निर्जन (एकान्त) वनभूमि है ॥ २ २॥ नित्य अपरोक्ष प्रत्यगात्मा
में स्थित, समाहित मन और दृष्टिवाले आप लोगों के आकाश आदि महाभूतों के तुल्य वन और घर
समान हैं