Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 57, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
स्वतो यदात्मसत्तायाश्चित्त्वात्सत्त्वैकवेदनम् ।
तदहंतादि भेदादि चेतनानीतिवत्स्थितम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मसत्ता का चित् होने से जो स्वतः एकमात्रसत्ता के रूप से वेदन है वह अहन्तादि, भेदआदि चिदाभास
के तुल्य स्थित हे