Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 57, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अन्तरात्मप्रकाशस्य स्वतो यदवभासनम् ।
तदहंतादि चित्त्वादि जीव इत्येव वेद सः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मप्रकाश का जो स्वतः अवभासन है वही अहन्ता त्वन्ता आदि की और
वृत्ति भेद से भिन्न चिदाभासो मे अनुगत सामान्य की कल्पना करता है वह जीव है