Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 57, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अन्तरस्ति यदात्मेन्दोश्चिद्रूपं चिद्रसायनम् ।
स्वत आस्वादितं तेन तदहंतादिनोदितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मरूपचन्द्रमा
के अन्दर जो चिद्रूप चिदमृत है उसके द्वारा स्वप्रकाश रूप से स्वतः आस्वादित वह अहन्ता आदिरूप
से आविर्भूत हुआ है