Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 57, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
असदाभास एवात्मा अनन्तो भरिताकृतिः ।
स्थितः सदैवैकघनो महाशैल इवात्मनि ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
असत् जगदाकार का अधिष्ठानभूत ही अनन्त आत्मा, जिसका कि स्वरूप
परिपूर्ण है, सर्वदा एकरूप होकर अपने स्वरूप में ही महान् पर्वत के समान अवस्थित है